शेयर बाज़ार का असली रोमांच तब दिखता है जब बड़े निवेशक बिना किसी शोर-शराबे के अपने निवेश में बदलाव करते हैं। हाल ही में ऐसा ही देखने को मिला जब भारत के मशहूर निवेशक मुकुल अग्रवाल ने अपनी कुछ पसंदीदा कंपनियों में हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से नीचे कर दी। यह बदलाव मार्केट में एक नई चर्चा पैदा कर रहा है।

मुकुल अग्रवाल कौन हैं?
मुकुल अग्रवाल भारत के सबसे सक्रिय और समझदार निवेशकों में से एक माने जाते हैं। विशेष रूप से स्मॉल और मिड-कैप शेयरों में उनकी पैठ काफी मजबूत है। फिलहाल वे 71 कंपनियों में निवेशित हैं और उनकी कुल सार्वजनिक हिस्सेदारी लगभग 7,507 करोड़ रुपये की है। मार्केट के रुझान और मौकों को पहचानकर तेज़ फैसले लेना उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
राघव प्रोडक्टिविटी एन्हांसर्स
राघव प्रोडक्टिविटी एenhancers लिमिटेड जयपुर स्थित कंपनी है जो रैमिंग मास, सिलिका और क्वार्ट्ज आधारित रिफ्रैक्टरी उत्पाद बनाती है। ये उत्पाद स्टील, फाउंड्री और अन्य भट्टी आधारित उद्योगों में उपयोग होते हैं। कंपनी का मार्केट कैप लगभग 3,255 करोड़ रुपये है और इसका शेयर 709 रुपये पर बंद हुआ।
पिछले तिमाही में मुकुल अग्रवाल की हिस्सेदारी 1.04 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 1 प्रतिशत से नीचे आ गई है। संभव है कि यह प्रोफ़िट बुकिंग या पोर्टफोलियो रिबैलेंसिंग का हिस्सा हो।
बीएसई लिमिटेड
1875 में स्थापित बीएसई लिमिटेड भारत का सबसे पुराना और विश्व स्तर पर जाना-पहचाना स्टॉक एक्सचेंज है। यह इक्विटी, करेंसी, डेरिवेटिव्स समेत डेटा और क्लियरिंग सेवाएं भी प्रदान करता है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग 1,00,758 करोड़ रुपये है और शेयर 2,473.80 रुपये पर बंद हुआ।
मुकुल अग्रवाल ने इसमें भी अपनी हिस्सेदारी 1.18 प्रतिशत से कम करके 1 प्रतिशत से नीचे कर दी है। इसे वैल्यूएशन नियंत्रण या लाभ संरक्षण की रणनीति समझा जा सकता है।
मिटकॉन कंसल्टेंसी
मिटकॉन कंसल्टेंसी एंड इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड नवीकरणीय ऊर्जा, बायोफ्यूल, सोलर-विंड प्रोजेक्ट, कार्बन क्रेडिट और एआई आधारित कृषि सेवाओं में समाधान देती है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग 130.78 करोड़ रुपये है और इसका शेयर 75.08 रुपये पर बंद हुआ।
अग्रवाल ने यहां भी अपनी हिस्सेदारी 1.47 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत से नीचे कर दी है। हालांकि कंपनी का बिजनेस फ्यूचर-ड्रिवन सेक्टर्स में है इसलिए इसकी दीर्घकालिक संभावनाएं बेहतर मानी जा रही हैं।
सूला वाइनयार्ड्स
सूला वाइनयार्ड्स प्रीमियम वाइन ब्रांड्स और वाइन टूरिज़्म के लिए प्रसिद्ध कंपनी है। यह देश में वाइन इंडस्ट्री को नए स्तर पर ले जाने का काम कर रही है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग 2,149 करोड़ रुपये है और शेयर 254.55 रुपये पर बंद हुआ। पिछली तिमाही में 1.78 प्रतिशत हिस्सेदारी अब कम होकर 1 प्रतिशत से नीचे हो गई है।
निष्कर्ष
चारों कंपनियों में हिस्सेदारी कम करने से यह साफ झलकता है कि मुकुल अग्रवाल अपने पोर्टफोलियो को सक्रिय रूप से ऑप्टिमाइज़ कर रहे हैं। यह किसी नकारात्मक संकेत की बजाय बेहतर अवसरों के लिए पूंजी तैयार रखने जैसा निर्णय प्रतीत होता है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए संकेत स्पष्ट है: जब अनुभवी निवेशक ऐसे सुधारात्मक कदम उठाते हैं, तब मार्केट में नए ट्रेंड चुपचाप जन्म लेते हैं। इन कंपनियों की बिजनेस स्ट्रेंथ और भविष्य की क्षमता अब भी मजबूत है। इसलिए यह मूव्स रणनीतिक लगते हैं, घबराने लायक नहीं।
बाज़ार में ऐसे अपडेट्स पर नज़र रखना आगे आने वाले बेहतरीन निवेश अवसरों के बारे में समय से पहले जानकारी दे सकता है।










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